Ashirwad Yog-Naturopathy College and Treatment Centre

Diabetes

डायबिटीज़: दवा नहीं दिशा बदलिए

डायबिटीज़: दवा नहीं दिशा बदलिए!

योग, नॅचरोपॅथी, आयुर्वेदिक आहार और भारतीय दिनचर्या से डायबिटीज़ पर जीत

क्या आपको पता है कि भारत डायबिटीज़ का केन्द्र बनता जा रहा है? परंतु डरिए मत — यह बीमारी दवा से नहीं, जीवनशैली से ठीक की जा सकती है। आज विज्ञान भी मानता है कि योग, नॅचरोपॅथी और भारतीय आहारशैली से Type-2 डायबिटीज़ को रिवर्स किया जा सकता है।

1. डायबिटीज़ क्या है?

Type-2 डायबिटीज़ एक जीवनशैली विकार (lifestyle disorder) है। इसका मुख्य कारण है —

  • असंतुलित आहार
  • शारीरिक निष्क्रियता
  • तनाव
  • अनियमित दिनचर्या

2. समाधान क्या है?

योग और नॅचरोपॅथी से समाधान

योग के प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, शुद्धिकर्म और वज्रासन जैसे अभ्यास पाचन तथा मेटाबॉलिज़्म को सुधारते हैं। नॅचरोपॅथी में जल चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा और सन-बाथ जैसे उपाय शरीर की शुद्धि में सहायक होते हैं।

भारतीय आहार पद्धति की भूमिका

पारंपरिक भारतीय मसाले और आहारविधि डायबिटीज़ नियंत्रण में बेहद उपयोगी हैं, उदाहरणतः:

  • मेथी दाना — इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाने में सहायक
  • हल्दी — सूजन घटाती है और रक्त शर्करा नियंत्रित रखने में मदद करती है
  • दालचीनी — मेटाबॉलिज्म को तेज करती है
  • करी पत्ता, जामुन बीज, त्रिफला, नीम पत्ता — शुगर कंट्रोल में उपयोगी
  • मिलेट्स (बाजरा, ज्वार, रागी) — कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले अनाज

व्रत और समयबद्ध भोजन (Time-Restricted Eating)

  • 2-टाइम मील प्लान — दोपहर 12 बजे और शाम 6 बजे भोजन पाचन के अनुकूल होता है।
  • इंटरमिटेंट फास्टिंग (उदा. 18 घंटे) — आधुनिक शोध और योग दोनों में इससे लाभ दिखा है।
  • आयुर्वेद में 'मिताहार' — कम मात्रा में, भूख से थोड़ी कम मात्रा का सेवन आरोग्यवर्धक माना जाता है।

विज्ञान भी मानता है

ऑटोफैगी (Autophagy) — शरीर की सेल-क्लीनिंग प्रक्रिया है जो उपवास द्वारा सक्रिय होती है और डायबिटीज़ नियंत्रण के लिये लाभकारी हो सकती है। ऑटोफैगी संबंधित शोध के लिये नोबेल पुरस्कार विजेता शोध भी मौजूद हैं।

युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु। युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा॥

(संतुलित आहार, दिनचर्या और अभ्यास से दुखों का नाश होता है)

आज ही तय करें

छोटे-छोटे परिवर्तन से बड़ा फर्क आता है:

  • सुबह नियमित योग अभ्यास करें
  • घर का बना शुद्ध, सात्विक भोजन प्राथमिकता दें
  • दिन में दो बार समयबद्ध भोजन रखें और आवश्यकतानुसार उपवास अपनाएँ
  • साप्ताहिक एक दिन फलाहार कर सकते हैं

नारा: दवा नहीं, जीवनशैली बदलें — और डायबिटीज़ को उल्टा घुमा दें।